अजित डोवाल Ajit Doval Biography in Hindi Blog

Ajit Doval Biography in Hindi Blog

देश की सुरक्षा केवल बॉर्डर पर सैनिकों को तैनात करने से नहीं होती, बल्कि कुछ ऐसे समर्पित देशभक्तों की जरूरत होती है, जो देश के लिए गुमनामी जिंदगी बिताते हुए दुश्मन के बीच में रहकर सेना को जानकारियाँ मुहैया कराये। जिससे देश के दुश्मनों का जड़ से खात्मा हो सके। इन्हीं देशभक्तों में Ajit Doval  का बड़ा नाम है, जिन्होंने अपनी जिंदगी के 40 साल देश की रक्षा खातिर गुमनामी में बिताए और कई बार आतंकी अटैक से देश को बचाए।

और आज देश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के पद पर कार्य हुए पाकिस्तान के कब्जेवाले कश्मीर में सफल सर्जिकल स्ट्राइक कर दुश्मन देश की रातों की नींद और दिन की चैन उड़ा चुके है।

दुश्मन देश उनके तेज तर्रार काम करने के तरीके को अच्छी तरह से जानता है, इसलिए केवल Ajit Doval के नाम से ही दुश्मन दल में खलबली मच जाती है।

आइये फ्रेंड, इस Biography  द्वारा जानते है, आखिर Ajit Doval कैसे अपने काम को अंजाम देते है कि वे रक्त का एक कतरा बिन बहाये, दुश्मन को छठी की दूध की याद दिला देते है ?

 

Family and Education

अजित डोभाल का जन्म 20 January 1945 ko  उत्तराखंड के पौरी गढ़वाल के गढ़वाली ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनके पिता एक आर्मी मेन थे, इसलिए उनकी प्रारम्भिक शिक्षा अजमेर मिलिटरी स्कूल में हुई। 1967 में उन्होंने आगरा यूनिवर्सिटी से इकोनॉमिक्स में पहली पोजीशन के साथ मास्टर की डिग्री प्राप्त की

IB Carrier

इसके बाद वे आईपीएस की तैयारी में लग गए, jisse उन्होंने 1968 में केरल केडर से कम्पीट किया और पुलिस अफसर बन गए। इसके चार साल बाद वे 1972 में इंटेलीजेंस ब्यूरो से जुड़ गए। यहीं से उनके जीवन का नया रूप जासूस के रूप में स्टार्ट हुआ।

Mizoram Shanti

जिसे उन्होंने बखूवी निभाते हुए 1980 में मिजोरम में उग्रवाद फैलाने वाले मिज़ो नेशनल फ्रंट के 7 में से 6 कमांडर को अपनी चतुराई से अपनी ओर करने में कामयाब करे, जिससे मिज़ो नेशनल फ्रंट की कमर टूट गई। इसके बाद मिजोरम में शांति स्थापित हुई।

Ajit Doval Biography in Hindi Blog

 

Swarna Mandir Par atanki hamla

इसी तरह वे अपनी जासूसी दायित्व को निभाते हुए 1984 में अमृतसर के स्वर्ण मंदिर पर हुए आतंकी हमले का बदला लेने के नियत से भारतीय सेना द्वारा चलाये जा रहे काउंटर ऑपरेशन ब्लू स्टार के तहत कार्य करते हुए एक रिक्शाचालक के वेश में मंदिर के अंदर गए और खलिस्तानियों की हर जानकारी आर्मी को दी। जिससे भारतीय आर्मी को खलिस्तानियों को मारने में कोई दिक्कत नहीं हुई और यह ऑपरेशन सफल रहा।

Kandhar plain hijack ghatna

1999 में जब पाकिस्तानी आतंकवादियों द्वारा भारतीय हवाई जहाज को कंधार में हाईजैक कर लिया गया था, तब अजित डोवाल को ही यह ज़िम्मेदारी दी गई कि वे उस जहाज में सवार सभी यात्रियों को सुरक्षित बचा लाये। जिसे वे अपने उत्क्रष्ट कौशल और वीरता से पूरा करने में सफल रहे। और वे इसी तरह नौ बार प्लेन हाईजैक होने से बचाने में कामयाब रहे।

 

Kaam Ka tarika

अजित डोभाल की काम की यह खासियत है कि वे दुश्मन के घर में घुसकर उन्हीं के साथ रहकर जानकारियाँ जुटाते है, कभी वे आपस में फुट लड़वा कर लड़ा भी देते है। फिर भारतीय सेना उनकी जानकारियों पर आगे की कार्यवाही करती है। यही वजह हैं कि उन्हें भारत या रियल लाइफ का जैमस बॉन्ड कहा जाता है।

Pakistan ko 7 saal Ullu banaya

जिसका सबूत उनकी इस घटना से मिलता है जब उन्होंने एक मुस्लिम के भेष में भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ के लिए काम करते हुए पाकिस्तान में 7 साल बिताए। इस दौरान उन्हें किसी ने शक तक नहीं किया।

Panjab aur jammu Kashmir shanty

उन्होंने अपनी जासूसी सेवाएँ जम्मू-कश्मीर और पंजाब के शांति के लिए भी दी, जिस दौरान उन्होंने गुमनामी के कुल 33 साल बिताए। कहा जाता है, उन्होंने अपनी सेवायों के दौरान मात्र 7 साल तक ही पुलिस की वर्दी पहनी। यह बात यहीं दर्शाता है कि उन्होंने किस तरह देश के प्रति समर्पण भाव से जासूसी करते हुए गुमनामी के लंबा पल बिताए।

Intellegancy beuro

उन्हें अपने काम का फल समय-समय पर प्रमोशन के रूप में इनाम मिलता रहा, और अंत में वे कभी आईबी के लिए काम करने वाले आईबी के डाइरेक्टर बन गए और पद पर गरिमापूर्ण काम करते हुए 2005 में रिटायर हो गए।

पर ये रिटायरमेंट तो एक महकमे से था, पर 70 वर्षीय अजित डोभाल ने अभी भी देश की रक्षा खातिर रिटायरमेंट नहीं लिया।

Myanmar Surgical Strike Involvement

उन्होंने 2015 में अपनी एक्टिविटी दिखाते हुए म्यांमार में पल रहे उग्रवादियों को सीमा में घुसकर मारा, जिसका नेतृत्व वे खुद कर रहे थे।

Pakistan Surgical Strike involvement

और 29 सितंबर 2016 की रात को वे पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में सफल सर्जिकल स्ट्राइक ऑपेरेशन कर राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के पद के शोभायमान बने हुए है।

Awards

अजित डोभाल ने अपने तेज तर्रार और गौरवमयी सरकारी कैरियर के दौरान पुलिस मेडल और देश का दूसरा सबसे बड़ा सम्मानीय अवार्ड कीर्ति चक्र प्राप्त कर चुके है। इस सम्मान को पाने वाले वे पहले पुलिस ऑफिसर है।

 

मुख्य कार्यो का एक विवरण

जो मैडल किसी आईपीएस अफसर को 17 साल बाद दिया जाता है वो मैडल AD ko सेवा के सिर्फ 6 सालो में ही पा लिया था।

AD पकिस्तान में 7 साल जासूस बनकर बिताये और इसी दौरान AD वहाँ की आर्मी में  मार्शल की पोस्ट तक पहुचे।

1984 में भारतीय सेना द्वारा चलाया गया ऑपरेशन ब्ल्यू स्टार के वक़्त AD पाकिस्तानी जासूस की भूमिका निभाकर खालिस्तानियों का का विश्वास जीतकर सेना को गुप् सूचना मुहैया करवाकर आपरेशन सफल बनाया।

इंडियन एयरलाइन्स की फ्लाइट-814 को काठमांडू से हाईजैक कर लिया गया था तब AD ही मुख्या वार्ताकार बनाया गया था और फिर बाद में फ्लाइटको कांधार ले जाया गया था और ये आपरेशन भी सफल हुआ था।

AD भारत के एक मात्र non army person हैं जिन्हें कीर्ति चक्र से नवाजा गया।

जब AD IB के चीफ थे उस दौरान उत्तर पूर्व में ललडेंगा के नेतृत्व में मिजो नेशनल फ्रंट ने हिंसात्मक माहौल बना रखा था ऐसे में AD उसका विश्वासजीतकर वहाँ का माहौल शांतिप्रिय बनाया।

जब 1993 में खालिस्तान लिबरेशन फ्रंट ने रोमानियाई राजनयिक लिविउ राडू  को बंधक बनाया तो AD उसे बचाने की भी सफल योजना बनायी।

बलोचिस्तान में RAW को फिर से एक्टिव करके उसे अंतराष्ट्रीय मुद्दा बनाया।

उत्तर पूर्व में सेना पर हुए हमले के बाद सीमा पार करके आतंकियों पर सर्जिकल स्ट्राइक करने की करने की सफल योजना भी AD ही बुद्धिमत्ता कासबूत है।जिसमे सेना ने म्यामार में 5 किलोमीटर अंदर घुसकर करीब 50 आतंकियों को मौत के घात उतारा।

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